सर्दियों की सुबह जब चारों तरफ धुंध छाई होती है, तो अक्सर लोग इसे सामान्य कोहरा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर धुंध कोहरा नहीं होती? कई बार आसमान में दिखाई देने वाली धुंध के पीछे हवा में मौजूद प्रदूषण भी हो सकता है। खासकर उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान कोहरा, धुंध और स्मॉग एक साथ दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में इनके बीच अंतर समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि जहां कोहरा मुख्य रूप से हवा में मौजूद नमी से बनता है, वहीं स्मॉग प्रदूषित हवा से जुड़ा होता है। सवाल यह है कि आखिर इन तीनों की पहचान कैसे करें और कैसे पता लगाएं कि जिस हवा में आप सांस ले रहे हैं, वह साफ है या प्रदूषित?
सबसे पहले समझते हैं कि कोहरा क्या होता है। कोहरा तब बनता है, जब हवा में मौजूद नमी ठंडी होकर पानी की बेहद छोटी-छोटी बूंदों में बदल जाती है। ये बूंदें जमीन के आसपास हवा में तैरती रहती हैं और दूर तक देखने में परेशानी पैदा करती हैं। आसान भाषा में कहें तो कोहरा जमीन के पास बना एक बादल होता है। ब्रिटेन के मौसम विभाग के अनुसार, जब दृश्यता घटकर लगभग एक किलोमीटर से कम रह जाती है, तो उस स्थिति को कोहरा कहा जाता है। कोहरा बनने के लिए आमतौर पर हवा में पर्याप्त नमी और अनुकूल तापमान की जरूरत होती है। रात में तापमान गिरने और हवा शांत रहने पर सुबह के समय घना कोहरा देखने को मिल सकता है।
अब बात करते हैं धुंध की। धुंध में हवा के भीतर मौजूद छोटे-छोटे कणों के कारण दूर की चीजें साफ दिखाई नहीं देतीं। इन कणों में धूल, धुआं और दूसरे सूक्ष्म कण शामिल हो सकते हैं। धुंध की वजह से वातावरण धुंधला दिखाई देता है और दूर की वस्तुओं को पहचानना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, केवल देखकर यह तय करना हमेशा संभव नहीं होता कि धुंध का कारण प्राकृतिक कण हैं या प्रदूषण। इसलिए धुंध दिखाई देने पर हवा की गुणवत्ता की जांच करना उपयोगी हो सकता है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण स्थिति है स्मॉग। स्मॉग शब्द स्मोक यानी धुआं और फॉग यानी कोहरे से मिलकर बना है। यह आमतौर पर उस स्थिति से जुड़ा होता है, जब हवा में प्रदूषक कण और गैसें जमा हो जाती हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों का उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य स्रोत वायु प्रदूषण बढ़ा सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में सूर्य की रोशनी और वायुमंडलीय रासायनिक प्रतिक्रियाओं के कारण भी प्रदूषक बनते हैं। सर्दियों में कम तापमान, धीमी हवा और वायुमंडल की कुछ स्थितियां प्रदूषकों को जमीन के पास जमा रहने में मदद कर सकती हैं। यही वजह है कि उत्तर भारत के कई इलाकों में ठंड के मौसम में प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है।
अब सवाल है कि आप कैसे पता करें कि हवा में प्रदूषण है या नहीं। इसका सबसे भरोसेमंद तरीका अपने इलाके का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI देखना है। AQI हवा में मौजूद प्रमुख प्रदूषकों के स्तर के आधार पर वायु गुणवत्ता की स्थिति बताता है। आप केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आधिकारिक प्लेटफॉर्म या संबंधित सरकारी वायु गुणवत्ता ऐप पर अपने शहर की ताजा जानकारी देख सकते हैं। AQI जितना खराब होगा, प्रदूषण से स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका उतनी ही अधिक हो सकती है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को खराब वायु गुणवत्ता के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल आसमान का रंग देखकर प्रदूषण का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता। सफेद रंग का घना कोहरा भी दृश्यता कम कर सकता है, जबकि प्रदूषण वाली हवा कभी-कभी सामान्य धुंध जैसी दिखाई देती है। इसी तरह, हवा साफ दिखाई देने का मतलब यह नहीं कि उसमें हानिकारक सूक्ष्म कण मौजूद नहीं हैं। PM2.5 जैसे बेहद छोटे कण आंखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए प्रदूषण की पहचान करने के लिए केवल आंखों पर निर्भर रहने के बजाय AQI और उपलब्ध वायु गुणवत्ता आंकड़ों को देखना ज्यादा बेहतर है।
अगर आपके इलाके में वायु गुणवत्ता खराब है, तो खुले में लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें और बाहर निकलते समय स्थानीय स्वास्थ्य सलाह का पालन करें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला, सही फिटिंग वाला N95 या समकक्ष मास्क सूक्ष्म कणों के संपर्क को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, घने कोहरे के दौरान सड़क पर वाहन चलाते समय धीमी गति रखें, उचित दूरी बनाए रखें और फॉग लाइट का इस्तेमाल करें। याद रखें, कोहरा और प्रदूषण दोनों अलग-अलग समस्याएं हैं और कई बार एक ही समय पर मौजूद हो सकती हैं।
इसलिए अगली बार सर्दियों की सुबह जब आपको चारों तरफ धुंध दिखाई दे, तो उसे सिर्फ कोहरा समझकर नजरअंदाज न करें। अपने शहर का AQI जरूर जांचें और उसी के अनुसार सावधानी बरतें। हवा की गुणवत्ता के बारे में सही जानकारी न केवल आपकी सेहत की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि परिवार के दूसरे सदस्यों को प्रदूषण से बचाने में भी मदद कर सकती है।

