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उत्तर भारत में बर्फबारी और बारिश का डबल अटैक! मुगल मार्ग-रोहतांग दर्रा बंद, दिल्ली समेत मैदानी इलाकों में तेज बारिश

उत्तर भारत में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी के बाद कई प्रमुख रास्तों को बंद करना पड़ा है, जबकि दिल्ली समेत मैदानी इलाकों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड तक मौसम का बदला हुआ मिजाज देखने को मिल रहा है। कहीं बर्फ की मोटी परत जम गई है, तो कहीं बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और यातायात की परेशानी बढ़ गई है। इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मानसून की देश से पूरी तरह विदाई की भी घोषणा कर दी है।

पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी का सबसे ज्यादा असर सड़क यातायात पर पड़ा है। जम्मू-कश्मीर में घाटी को जम्मू क्षेत्र से जोड़ने वाले वैकल्पिक रास्ते मुगल मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया गया है। अधिकारियों ने सड़कों से बर्फ हटाने के लिए कर्मचारियों और मशीनों को तैनात किया है। प्रशासन की प्राथमिकता रास्तों को सुरक्षित बनाना और यात्रियों को किसी भी संभावित खतरे से बचाना है।

हिमाचल प्रदेश में भी ताजा बर्फबारी के बाद हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं। सड़कों पर बर्फ जमने से फिसलन बढ़ गई है, जिससे वाहनों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। इसी वजह से रोहतांग दर्रे से सरचू, दारचा से शिंकु ला, ग्रामफू से बाटल और सच दर्रे समेत कई मार्गों को बंद कर दिया गया है। इन इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

वहीं, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी मौसम का असर साफ दिखाई दिया। बृहस्पतिवार को दिनभर आसमान में घने बादल छाए रहे और रुक-रुककर बारिश होती रही। तेज हवाओं के कारण मौसम ठंडा हो गया, जबकि कई इलाकों में दृश्यता कम होने और जलभराव के चलते यातायात प्रभावित हुआ। अचानक बदले मौसम ने लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी असर डाला।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर भारत में इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और आसपास के क्षेत्रों में बने चक्रवाती परिसंचरण की भूमिका रही। इन मौसमी प्रणालियों के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश देखने को मिली। जम्मू-कश्मीर के मैदानी क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई, जिससे कई स्थानों पर तापमान में गिरावट आई।

बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो जम्मू क्षेत्र के उधमपुर में सबसे अधिक 59.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा पुंछ में 39.5 मिलीमीटर, सांबा और शोपियां में 34-34 मिलीमीटर, बारामूला में 29 मिलीमीटर और कटरा में 23.1 मिलीमीटर बारिश हुई। श्रीनगर में भी 12 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण जम्मू क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति भी बन गई।

उत्तराखंड में भी मौसम का असर देखने को मिला। ऊंचाई वाले इलाकों और राजधानी देहरादून में सुबह बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर बारिश हुई। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई। इसी बीच रुद्रप्रयाग जिले में केदारनाथ पैदल मार्ग पर पहाड़ी से चट्टानें गिरने के कारण एक व्यक्ति घायल हो गया। उसे प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति, चंबा और कांगड़ा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फबारी हुई। शिंकु ला, बारालाचा ला, कुंजुम ला, कोकसर, जिस्पा, केलांग और गोंदला जैसे इलाकों में बर्फ की चादर बिछ गई। पांगी घाटी के सुरल में करीब तीन इंच तक बर्फबारी हुई, जबकि सच दर्रे पर लगभग एक फुट बर्फ गिरने की खबर है। बर्फबारी के बाद गोंदला के पास फंसे करीब 100 वाहनों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला।

मौसम में इस बदलाव से जहां आम लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है, वहीं पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों को फायदा होने की उम्मीद है। मनाली और धर्मशाला में तापमान गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने गर्म कपड़े निकाल लिए हैं और ठंड से बचने के लिए अलाव जलाने शुरू कर दिए हैं। पर्यटन व्यवसायियों को उम्मीद है कि ताजा बर्फबारी के बाद पहाड़ी इलाकों में पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है।

दूसरी ओर, मौसम विभाग ने दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून के सक्रिय होने की जानकारी दी है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक और केरल में बारिश की गतिविधियां जारी रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 21 अक्टूबर तक दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।

फिलहाल, उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश के कारण मौसम तेजी से बदल रहा है। ऐसे में पहाड़ों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति और मौसम संबंधी चेतावनियों की जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए। खासकर बंद दर्रों और बर्फबारी प्रभावित मार्गों पर प्रशासन की अनुमति के बिना यात्रा करने से बचना जरूरी है।

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