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ईरान का ब्रिटेन पर बड़ा एक्शन! रॉयल नेवी और एयरफोर्स आतंकवादी घोषित, MI6 को भी नहीं छोड़ा

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अब ब्रिटेन के खिलाफ ऐसा कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। तेहरान ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं, ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी एमआई6 को भी शत्रुतापूर्ण समूह की श्रेणी में डाल दिया गया है। ईरान के इस फैसले को ब्रिटेन के खिलाफ सीधी जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अब ईरान और ब्रिटेन के बीच तनाव एक नए स्तर पर पहुंचने वाला है और क्या इसका असर पश्चिमी देशों की सैन्य रणनीति पर भी पड़ सकता है?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को इस फैसले की घोषणा की। मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई ब्रिटेन की ओर से पिछले एक साल के दौरान उठाए गए कदमों के जवाब में की गई है। ईरान ने आरोप लगाया है कि ब्रिटिश सरकार अमेरिका और इजरायल को उसके खिलाफ सैन्य अभियानों में मदद दे रही है। तेहरान का दावा है कि ब्रिटेन ने अपने अधिकार क्षेत्र में मौजूद सैन्य अड्डों, सुविधाओं और रसद व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी और इजरायली अभियानों के समर्थन में करने की अनुमति दी है। ईरान का कहना है कि इस तरह की सहायता उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती है। हालांकि, ब्रिटेन की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर प्रतिक्रिया और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू बनी हुई है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में ब्रिटेन की नीतियों को शत्रुतापूर्ण बताते हुए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का हवाला दिया है। मंत्रालय का कहना है कि किसी दूसरे देश की संप्रभुता का सम्मान करना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का बुनियादी सिद्धांत है और इसके विपरीत कदम उठाने वाले देशों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसका यह फैसला देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के आधार पर लिया गया है। इसके साथ ही उसने ब्रिटिश सरकार को चेतावनी दी है कि इस कार्रवाई के परिणामों की जिम्मेदारी लंदन को उठानी होगी।

इस पूरे मामले में ब्रिटेन का जुलाई 2026 में लिया गया फैसला भी बेहद महत्वपूर्ण है। ब्रिटिश सरकार ने 13 जुलाई को अपने स्टेट थ्रेट्स एक्ट 2026 के तहत ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के दायरे में शामिल किया था। ब्रिटेन का कहना था कि यह कदम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। लेकिन ईरान ने इस कार्रवाई को अपने खिलाफ शत्रुतापूर्ण कदम माना। अब तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ब्रिटेन की सैन्य शाखाओं और खुफिया एजेंसी को निशाने पर लिया है। इस तरह दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेद और गहरे होते दिखाई दे रहे हैं।

ईरान के फैसले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसने ब्रिटेन की तीन प्रमुख सुरक्षा संस्थाओं को अलग-अलग श्रेणियों में रखा है। रॉयल नेवी ब्रिटेन की समुद्री सैन्य शक्ति है, जबकि रॉयल एयर फोर्स देश की वायुसेना के रूप में काम करती है। इन दोनों को ईरान ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है। वहीं एमआई6, जिसे सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस भी कहा जाता है, ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी है। इसका काम दूसरे देशों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सूचनाएं जुटाना और ब्रिटिश सरकार को खुफिया जानकारी उपलब्ध कराना है। ईरान ने एमआई6 को आतंकवादी संगठन कहने के बजाय शत्रुतापूर्ण समूह की श्रेणी में रखा है।

विशेषज्ञों की नजर में इस तरह के फैसले का राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व काफी अधिक होता है। हालांकि, किसी देश की ओर से दूसरे देश की सेना को आतंकवादी संगठन घोषित करने से उसकी कानूनी स्थिति पूरी दुनिया में नहीं बदल जाती। इसका प्रभाव संबंधित देश के अपने कानूनों और अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत ही होता है। फिर भी इस तरह की घोषणा दोनों देशों के बीच अविश्वास और तनाव को बढ़ा सकती है। ब्रिटेन और ईरान के बीच अब आगे किस तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी, यह महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही दबाव में है। ऐसे समय में ब्रिटेन के खिलाफ ईरान का यह कदम पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंधों को और संवेदनशील बना सकता है। अब पूरी दुनिया की नजर ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। क्या लंदन इस फैसले के जवाब में कोई नया कदम उठाएगा या दोनों देश कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश करेंगे? आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि ईरान और ब्रिटेन के बीच बढ़ता यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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