होर्मुज जलडमरूमध्य में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान की पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी यानी PGSA ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले 11 और जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। ईरानी अथॉरिटी का आरोप है कि इन जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े ईरानी नियमों का पालन नहीं किया। नए 11 जहाजों के नाम जुड़ने के बाद अब ईरान की नियमों का पालन न करने वाले जहाजों की सूची यानी NCV लिस्ट में कुल 56 जहाज शामिल हो गए हैं। इस कार्रवाई के बाद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधियों को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
PGSA ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी NCV लिस्ट अपडेट करने की जानकारी दी। अथॉरिटी के मुताबिक, इस सूची में नए नाम शामिल करने के लिए आम लोगों से मिली जानकारी का भी इस्तेमाल किया गया। PGSA ने उन लोगों का औपचारिक रूप से आभार जताया, जिन्होंने जहाजों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराकर इस प्रक्रिया में सहयोग किया। यानी अब ईरान अपनी निगरानी व्यवस्था के साथ-साथ लोगों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर भी संभावित नियम उल्लंघन करने वाले जहाजों पर नजर रख रहा है।
ईरान ने PGSA को होर्मुज जलडमरूमध्य और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों को मैनेज और मॉनिटर करने वाली रेगुलेटरी बॉडी के तौर पर स्थापित किया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी से बाहर निकलने और भीतर आने वाले जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद अहम है। खासतौर पर ऊर्जा और कार्गो की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही में इसकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की पाबंदी या अतिरिक्त निगरानी का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और व्यापार पर भी पड़ सकता है।
PGSA ने ब्लैकलिस्ट किए गए जहाजों के साथ कारोबार या सहयोग करने वाले दूसरे जहाजों को भी चेतावनी दी है। अथॉरिटी के मुताबिक, अगर कोई जहाज पहले से ब्लैकलिस्ट किए गए जहाज के साथ सहयोग करता हुआ पाया जाता है, तो उसे भी NCV लिस्ट में शामिल किया जा सकता है। इसका मतलब साफ है कि ईरान की कार्रवाई केवल उन 56 जहाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन जहाजों और कंपनियों पर भी नजर रखी जा रही है, जो प्रतिबंधित जहाजों के साथ सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से काम कर सकते हैं।
अथॉरिटी ने फारस की खाड़ी में सामान लाने-ले जाने वाले कार्गो मालिकों को भी खास सलाह दी है। PGSA ने कहा है कि किसी जहाज को किराए पर लेने से पहले उसकी NCV यानी नियमों का पालन न करने वाले जहाजों की सूची में स्थिति जरूर जांची जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर कोई कार्गो मालिक अनजाने में ब्लैकलिस्ट किए गए जहाज को किराए पर लेता है या उसके साथ कारोबार करता है, तो उसे भी संभावित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
ईरान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ भविष्य में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। संभावित कार्रवाई में जुर्माना, जहाज को हिरासत में लेना और यहां तक कि जहाज की जब्ती जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। ऐसे में समुद्री कंपनियों और कार्गो ऑपरेटरों के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे ईरानी नियमों और NCV लिस्ट को ध्यान से जांचकर ही अपने जहाजों से जुड़े फैसले लें।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ईरान ने एक साथ 11 और जहाजों को ब्लैकलिस्ट करने का फैसला क्यों किया और आने वाले दिनों में इस सूची में और कितने जहाजों के नाम जुड़ेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए ईरान की यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के लिए एक गंभीर संकेत मानी जा रही है। अगर प्रतिबंधित जहाजों की संख्या लगातार बढ़ती है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई तेज होती है, तो इसका असर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यापार पर भी दिखाई दे सकता है।
फिलहाल PGSA की नई कार्रवाई ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। 56 जहाजों के ब्लैकलिस्ट होने के बाद अब निगाह इस बात पर है कि ईरान आगे क्या कदम उठाता है और क्या इस सूची में आने वाले दिनों में और जहाज शामिल किए जाते हैं। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां और कार्गो मालिक ईरान की चेतावनी के बाद अपनी समुद्री गतिविधियों को किस तरह से एडजस्ट करते हैं, यह भी देखने वाली बात होगी।


