डिजिटल दौर में जहां स्मार्टफोन, वायरलेस ईयरबड्स और हर समय इंटरनेट से जुड़े रहने की आदत लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है, वहीं अब युवाओं के बीच एक अलग तरह का तकनीकी रुझान देखने को मिल रहा है। कई युवा स्मार्ट फीचर्स और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन से दूरी बनाने के लिए पुराने माने जाने वाले गैजेट्स की ओर लौट रहे हैं। वायर्ड ईयरफोन, ऑफलाइन एमपी3 प्लेयर और कॉम्पैक्ट कैमरे जैसे उपकरण एक बार फिर युवाओं की पसंद बनते दिखाई दे रहे हैं।
इस बदलाव के पीछे डिजिटल थकान को एक महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है। आज लोग लगातार व्हाट्सऐप संदेश, इंस्टाग्राम सूचनाओं, ईमेल और दूसरी डिजिटल गतिविधियों से जुड़े रहते हैं। हर कुछ मिनट में फोन की स्क्रीन पर आने वाले नए संदेश और सूचनाएं ध्यान भटकाने का कारण बनते हैं। ऐसे में कुछ युवा ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहते हैं, जिसमें इंटरनेट, सामाजिक माध्यम और लगातार आने वाली सूचनाओं का दबाव न हो।
इसी वजह से वायरलेस ईयरबड्स के साथ-साथ वायर्ड ईयरफोन की मांग भी बढ़ती दिखाई दे रही है। वायर्ड ईयरफोन में किसी तरह की वायरलेस जोड़ने की प्रक्रिया या बैटरी चार्ज करने की जरूरत नहीं होती और इसे सीधे उपकरण से जोड़कर संगीत सुना जा सकता है। युवाओं के एक वर्ग के लिए इसकी सादगी ही इसकी खासियत बन रही है।
ऑफलाइन एमपी3 प्लेयर भी इसी बदलाव का हिस्सा हैं। स्मार्टफोन में संगीत सुनने के दौरान संदेश, सामाजिक माध्यम और अन्य सूचनाएं लगातार ध्यान खींचती रहती हैं। इसके मुकाबले एमपी3 प्लेयर का इस्तेमाल केवल संगीत सुनने तक सीमित रखा जा सकता है। यही वजह है कि कुछ युवा अपने फोन से अलग एक छोटे उपकरण में संगीत संग्रह करके उसे सुनना पसंद कर रहे हैं।
उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, हाल के महीनों में वायर्ड ईयरफोन और डिजिटल ऑडियो प्लेयर खरीदने वाले नए ग्राहकों की संख्या में कई गुना वृद्धि देखने को मिली है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, कुछ उत्पादों में नए ग्राहकों की संख्या करीब आठ से दस गुना तक बढ़ी है। हालांकि ये आंकड़े पूरे बाजार की स्थिति को दर्शाते हैं या किसी खास कंपनी अथवा श्रेणी तक सीमित हैं, यह अलग-अलग बाजार रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
पुराने गैजेट्स की वापसी केवल ऑडियो उत्पादों तक सीमित नहीं है। कॉम्पैक्ट कैमरों की मांग में भी बढ़ोतरी की बात सामने आ रही है। स्मार्टफोन के कैमरे लगातार बेहतर होने के बावजूद कुछ युवा अलग कैमरा रखने की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि कैमरे से तस्वीर लेने का अनुभव फोन से अलग होता है और तस्वीर खींचने के दौरान अन्य डिजिटल गतिविधियों से दूरी बनी रहती है।
कॉम्पैक्ट कैमरों को लेकर उपलब्ध आंकड़ों में मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर होने का दावा किया गया है। इसके अलावा वर्ष 2025 में दुनिया भर में कॉम्पैक्ट कैमरों के शिपमेंट में 29.6 प्रतिशत की वृद्धि का आंकड़ा भी सामने आया है। यह आंकड़ा इस बात की ओर संकेत करता है कि स्मार्टफोन कैमरों के दौर में भी समर्पित कैमरा उपकरणों के लिए बाजार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
नई पीढ़ी के लिए इन पुराने गैजेट्स का आकर्षण केवल पुरानी यादों तक सीमित नहीं है। कई युवाओं ने आईपॉड या पुराने वॉकमैन जैसे उपकरणों का इस्तेमाल कभी किया भी नहीं है। ऐसे युवाओं के लिए ये उपकरण पुराने होने के बजाय एक अलग और नया अनुभव देते हैं। बिना इंटरनेट, सामाजिक माध्यम और लगातार आने वाली सूचनाओं के संगीत सुनना या तस्वीरें लेना उनके लिए डिजिटल दुनिया से थोड़ी दूरी बनाने का तरीका बन रहा है।
तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, इसे तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाने के बजाय तकनीक के इस्तेमाल पर नियंत्रण पाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। युवा स्मार्टफोन और आधुनिक उपकरणों को पूरी तरह छोड़ नहीं रहे हैं, बल्कि कुछ कामों के लिए सरल और सीमित सुविधाओं वाले उपकरण चुन रहे हैं। यानी तकनीक का इस्तेमाल वही है, लेकिन उसके साथ जुड़ी लगातार कनेक्टिविटी को कम करने की कोशिश दिखाई दे रही है।
आने वाले समय में यह रुझान कितना बड़ा बाजार बनता है, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल वायर्ड ईयरफोन, ऑफलाइन एमपी3 प्लेयर और कॉम्पैक्ट कैमरों की बढ़ती दिलचस्पी यह संकेत जरूर दे रही है कि अत्यधिक डिजिटल जुड़ाव के बीच कुछ युवा सादगी, ऑफलाइन अनुभव और बिना रुकावट के संगीत या फोटोग्राफी को फिर से महत्व देने लगे हैं।


