विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को घाना में भारत की विकास साझेदारी और ग्लोबल साउथ के बीच सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत बनाने में क्षमता निर्माण और कौशल विकास की अहम भूमिका है। जयशंकर ने यह बात घाना में इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन यानी ITEC कार्यक्रम के पूर्व छात्रों के साथ बातचीत के दौरान कही।
जयशंकर ने घाना में ITEC कार्यक्रम से जुड़े रहे पूर्व छात्रों से मुलाकात की और भारत की इस प्रमुख क्षमता-निर्माण पहल के प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ITEC जैसे कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए भारत और दूसरे विकासशील देशों के बीच लंबे समय तक चलने वाले संबंध भी मजबूत होते हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी देश के विकास में मानव संसाधन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब किसी देश के युवाओं और पेशेवरों को नए कौशल, तकनीकी ज्ञान और बेहतर प्रशिक्षण के अवसर मिलते हैं, तो इसका फायदा केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्था को मिलता है। इसी वजह से भारत अपनी विकास साझेदारी में क्षमता निर्माण को विशेष महत्व देता है।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी घाना में ITEC कार्यक्रम के पूर्व छात्रों से हुई मुलाकात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि घाना में ITEC के पूर्व छात्रों के साथ बातचीत करके उन्हें खुशी हुई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षमता विकास और कौशल को बेहतर बनाना भारत की विकास साझेदारी और साउथ-साउथ सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ITEC भारत की उन प्रमुख पहलों में शामिल है, जिसके माध्यम से विभिन्न विकासशील देशों के नागरिकों को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके तहत अलग-अलग क्षेत्रों में पेशेवर प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस पहल के जरिए भारत ने लंबे समय से कई देशों के साथ अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की है।
घाना के संदर्भ में यह सहयोग भारत और अफ्रीकी देशों के बीच बढ़ते संबंधों को भी दर्शाता है। भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, क्षमता निर्माण और विकास साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में ITEC जैसे कार्यक्रम दोनों पक्षों के बीच लोगों से लोगों के जुड़ाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जयशंकर का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग को लेकर चर्चा लगातार बढ़ रही है। विकासशील देश अपनी प्राथमिकताओं, चुनौतियों और विकास के अनुभवों को साझा करते हुए एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। भारत भी इस प्रक्रिया में क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और कौशल विकास को महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में आगे बढ़ा रहा है।
विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि विकास साझेदारी का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि देशों को अपने मानव संसाधन और संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करना भी है। कौशल और ज्ञान में निवेश से देशों को लंबे समय में आत्मनिर्भर बनने और अपनी विकास क्षमता को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
घाना में ITEC के पूर्व छात्रों के साथ जयशंकर की बातचीत इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा मानी जा रही है। भारत की ओर से क्षमता निर्माण और कौशल विकास पर दिया जा रहा जोर आने वाले समय में अफ्रीकी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने का माध्यम बन सकता है।


