आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बीच गूगल ने अपनी डेटा कलेक्शन पॉलिसी में अहम बदलाव किए हैं। कंपनी की नई सेटिंग के तहत अब केवल टेक्स्ट सर्च ही नहीं, बल्कि Google Lens, Voice Search, Search Live, Translate Speaking Practice और अन्य सेवाओं के दौरान इस्तेमाल होने वाली तस्वीरें, ऑडियो, वीडियो और अन्य मीडिया फाइलें भी स्टोर की जा सकती हैं। इस बदलाव का उद्देश्य AI मॉडल को अधिक स्मार्ट और सटीक बनाना बताया गया है, लेकिन इसके साथ ही यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर नई बहस भी शुरू हो गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गूगल अकाउंट में Search Service History नाम की नई सेटिंग जोड़ी जा रही है। इस फीचर के जरिए AI और सर्च सेवाओं के दौरान इस्तेमाल होने वाले मल्टीमीडिया डेटा को सेव किया जा सकता है। इसमें यूजर द्वारा अपलोड की गई तस्वीरें, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो, डॉक्यूमेंट और अन्य फाइलें भी शामिल हो सकती हैं। गूगल अपने यूजर्स को इस बदलाव की जानकारी नोटिफिकेशन के माध्यम से भी दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक AI मॉडल को बेहतर बनाने के लिए केवल टेक्स्ट डेटा पर्याप्त नहीं होता। तस्वीरें, वीडियो और आवाज जैसे मल्टीमॉडल डेटा की मदद से AI वास्तविक दुनिया को अधिक बेहतर तरीके से समझ पाता है। यही वजह है कि गूगल समेत कई बड़ी टेक कंपनियां अब मल्टीमीडिया डेटा पर अधिक फोकस कर रही हैं। गूगल के पास दुनिया के सबसे बड़े यूजर बेस में से एक होने के कारण उसे रोजाना बड़ी मात्रा में डेटा मिलता है, जो AI ट्रेनिंग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि, इस बदलाव के बाद प्राइवेसी को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। प्राइवेसी विशेषज्ञों का मानना है कि पहले की तुलना में अधिक मीडिया डेटा स्टोर होने से डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं। गूगल का कहना है कि इस डेटा का उपयोग यूजर एक्सपीरियंस और AI सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा तथा यूजर्स को अपनी सेटिंग्स नियंत्रित करने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
अगर कोई यूजर नहीं चाहता कि उसका मीडिया डेटा सेव किया जाए, तो वह इसे बंद भी कर सकता है। इसके लिए सबसे पहले Google My Activity में जाएं। वहां Search Service History विकल्प खोलें और Saved Media से जुड़े विकल्प को अनचेक कर दें। इसके बाद गूगल संबंधित मीडिया डेटा को स्टोर नहीं करेगा। हालांकि कुछ सेवाओं के सामान्य संचालन के लिए सीमित डेटा प्रोसेसिंग जारी रह सकती है।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि AI के दौर में यूजर्स के लिए समय-समय पर अपने गूगल अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करना बेहद जरूरी हो गया है। इससे यह तय किया जा सकता है कि कौन-सा डेटा शेयर किया जाए और कौन-सा नहीं। नई तकनीकों के साथ सुविधा तो बढ़ रही है, लेकिन डिजिटल प्राइवेसी के प्रति जागरूक रहना भी पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।


