मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ईरान के साथ बातचीत शुरू करने की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता सोमवार दोपहर से शुरू होगी। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने और कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बढ़ी है।
न्यू जर्सी से वॉशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर चुका था। हालांकि, क्षेत्रीय सहयोगी देशों के अनुरोध और बातचीत की संभावना को देखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया गया। उनके अनुसार, कूटनीतिक प्रयासों को एक और मौका देना जरूरी था।
ट्रंप ने दावा किया कि प्रस्तावित सैन्य अभियान बेहद व्यापक होता और इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में गिना जा सकता था। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ईरान सहित कई पक्षों ने उनसे सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने का आग्रह किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह संघर्ष के बजाय समझौते के पक्षधर हैं। उनके अनुसार, यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है तो इससे बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि किसी सैन्य टकराव की वजह से अनावश्यक जनहानि हो।
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के लिए कोई समय-सीमा तय की गई है, तो ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि सैन्य कार्रवाई होती, तो उसके परिणाम ईरान के लिए बेहद गंभीर हो सकते थे। साथ ही उन्होंने कहा कि सऊदी अरब सहित कई क्षेत्रीय देशों को भी विश्वास है कि बातचीत के जरिए समझौता संभव है।
इससे पहले ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भी कहा था कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है, लेकिन ईरान और मध्य पूर्व के कई देशों की ओर से समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने के बाद सैन्य कार्रवाई को स्थगित करने का फैसला लिया गया।
ट्रंप ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं के समाधान की दिशा में प्रगति हो सकती है। हालांकि, वार्ता के नतीजे क्या होंगे, यह आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा।


