दिल्ली में CBI की फर्जी रेड डालकर एक कारोबारी को डराने और कथित तौर पर उससे पैसे ऐंठने की कोशिश के मामले ने सनसनी मचा दी है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 29 साल की आसिफा और 27 साल की पूजा अग्रवाल की कथित तौर पर अहम भूमिका सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, दोनों ने मिलकर इस पूरी साजिश की योजना तैयार की और इसके लिए फर्जी CBI अधिकारियों की टीम खड़ी की गई।
मामला दिल्ली के प्रशांत विहार इलाके का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, 11 अगस्त की रात कई लोग एक कारोबारी के घर पहुंचे और खुद को CBI अधिकारी बताने लगे। अचानक घर पर CBI की रेड की बात सुनकर परिवार में हड़कंप मच गया। आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी पहचान पत्र दिखाए और घर की तलाशी लेने की बात कही। लेकिन परिवार को उनकी गतिविधियों पर शक होने लगा।
परिवार ने जब कथित अधिकारियों से सर्च वारंट और दूसरे आधिकारिक दस्तावेज मांगे तो उनकी मुश्किल बढ़ने लगी। आरोप है कि फर्जी अधिकारी परिवार को डराने की कोशिश करते रहे। करीब डेढ़ घंटे तक यह पूरा घटनाक्रम चलता रहा। इसी दौरान आसपास के लोगों को भी मामले की भनक लग गई और वहां भीड़ जमा होने लगी। हालात बिगड़ते देख आरोपी गाड़ी में जरूरी दस्तावेज होने की बात कहकर मौके से निकल गए और फिर वापस नहीं लौटे।
इसके बाद कारोबारी के परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और दूसरे तकनीकी सबूतों की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंची। जांच के दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से फर्जी सरकारी पहचान पत्रों से जुड़ी सामग्री और CBI के नाम का इस्तेमाल करने वाले कपड़े या अन्य सामान भी मिले हैं।
इस पूरे मामले में आसिफा और पूजा अग्रवाल की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। पुलिस के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने कथित तौर पर पूरी योजना बनाने में अहम भूमिका निभाई। जांच में सामने आया कि दोनों की पहले से पहचान थी और बाद में इस कथित साजिश को अंजाम देने के लिए दूसरे लोगों को भी नेटवर्क में शामिल किया गया।
इस मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी एक पूर्व बैंक कर्मचारी को बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, 63 वर्षीय कुलदीप शर्मा की कारोबारी परिवार से पहले से पहचान थी। आरोप है कि उसने कारोबारी और उसके परिवार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आरोपियों तक पहुंचाई। पुलिस को शक है कि इसी जानकारी के आधार पर कथित फर्जी CBI रेड के लिए कारोबारी को निशाना बनाया गया।
इसके बाद फर्जी अधिकारियों की टीम तैयार की गई। आरोप है कि कुछ लोगों को सरकारी जांच एजेंसी के अधिकारियों जैसा दिखने के लिए तैयार किया गया और उन्हें कारोबारी के घर भेजा गया। पूरी कोशिश यही थी कि परिवार को यह विश्वास हो जाए कि वास्तव में CBI की टीम जांच करने पहुंची है। लेकिन परिवार की सतर्कता के कारण कथित योजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।
पुलिस को जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से भी महत्वपूर्ण सुराग मिलने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि फोन में ऐसे फोटो और वीडियो मौजूद थे जिनमें कुछ लोग सरकारी एजेंसियों के अधिकारी जैसा रूप धारण करते दिखाई दे रहे हैं। अब पुलिस इन डिजिटल सबूतों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह ने इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति को इसी तरह निशाना बनाया था।
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस को शक है कि अगर आरोपियों ने पहले भी इसी तरह की फर्जी रेड की है तो उनके पुराने मामलों का पता लगाना जरूरी होगा। यही वजह है कि गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि CBI, ED या पुलिस जैसी जांच एजेंसियों का नाम सुनकर आम तौर पर लोग घबरा जाते हैं। इसी डर का फायदा उठाकर अपराधी लोगों को अपना शिकार बना सकते हैं। इसलिए अगर कोई व्यक्ति खुद को किसी सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर आपके घर पहुंचता है, तो उसकी पहचान और आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल सात आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस कथित फर्जी CBI रेड की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। अब देखना होगा कि पूछताछ में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और क्या यह गिरोह पहले भी इसी तरीके से किसी दूसरे कारोबारी या परिवार को निशाना बना चुका है। दिल्ली की इस कथित फर्जी रेड ने एक बार फिर दिखा दिया है कि सरकारी एजेंसी का नाम और डर दिखाकर ठगी करने वाले गिरोह कितनी शातिर तरीके से लोगों को फंसाने की कोशिश कर सकते हैं।


