हाल के टी20 मुकाबलों में लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सामने अब खुद को साबित करने का बड़ा मौका है। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय टीम रविवार को महिला टी20 एशिया कप के ग्रुप ए मुकाबले में थाईलैंड के खिलाफ उतरेगी। भारतीय टीम इस टूर्नामेंट की शुरुआत बड़ी जीत के साथ करना चाहेगी, ताकि हाल की हार और खराब फॉर्म को पीछे छोड़कर एक बार फिर एशिया में अपना दबदबा कायम करने की दिशा में आगे बढ़ सके। मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 8 बजे शुरू होगा।
महिला टी20 एशिया कप में पिछले एक दशक के दौरान भारत का प्रदर्शन शानदार रहा है। टी20 प्रारूप में खेले गए टूर्नामेंट के पांच संस्करणों में भारतीय टीम ने तीन बार खिताब अपने नाम किया है। लेकिन इस बार टीम के सामने चुनौती काफी बड़ी है, क्योंकि हाल के मुकाबलों में प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भारत ने इस साल खेले 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में से नौ गंवाए हैं। हाल ही में महिला टी20 विश्व कप में भी भारतीय टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी थी।
इस खराब प्रदर्शन के बीच कप्तान हरमनप्रीत कौर की फॉर्म भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने अच्छा प्रदर्शन जरूर किया था, लेकिन उनके प्रदर्शन में निरंतरता की कमी टीम के लिए चिंता बनी हुई है। एशिया कप के तुरंत बाद एशियाई खेल भी होने हैं, इसलिए भारतीय टीम के लिए आने वाले मुकाबले बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन दोनों प्रतियोगिताओं में भारत को खिताब का मजबूत दावेदार माना जा रहा है और टीम को अपनी लय जल्द हासिल करनी होगी।
भारत को ग्रुप ए में थाईलैंड, हांगकांग और पाकिस्तान के साथ रखा गया है। टीम के मध्य क्रम के सामने सबसे बड़ी चुनौती जेमिमा रोड्रिग्स की अनुपस्थिति में दिखाई देगी। जेमिमा के बाहर होने के बाद प्रतिका रावल को टीम में शामिल किया गया है, लेकिन मध्य क्रम में जेमिमा जैसी भरोसेमंद बल्लेबाज की कमी भारतीय टीम को महसूस हो सकती है। स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा के रूप में भारत के पास मजबूत सलामी जोड़ी है, लेकिन तीसरे नंबर से लेकर मध्य क्रम तक बल्लेबाजों को रन गति बनाए रखने की चुनौती होगी।
भारतीय टीम की एक और बड़ी चिंता फील्डिंग रही है। पिछले मुकाबलों में खिलाड़ियों ने कई महत्वपूर्ण कैच छोड़े थे और खराब फील्डिंग का सीधा असर टीम के नतीजों पर पड़ा। ऐसे में एशिया कप में भारतीय खिलाड़ियों को फील्डिंग के स्तर में सुधार करना होगा। छोटे प्रारूप में एक कैच या कुछ अतिरिक्त रन पूरे मैच का रुख बदल सकते हैं, इसलिए भारत के लिए इस विभाग में गलती की गुंजाइश बेहद कम होगी।
गेंदबाजी की बात करें तो भारत के पास अनुभवी स्पिनर दीप्ति शर्मा के नेतृत्व में मजबूत स्पिन आक्रमण है। उनके साथ श्री चरणी, राधा यादव और प्रेमा रावत जैसे विकल्प मौजूद हैं। तेज गेंदबाजी में भी रेणुका सिंह ठाकुर के साथ क्रांति गौड़, अरुंधति रेड्डी और नंदनी शर्मा टीम को मजबूती देती हैं। भारतीय गेंदबाजों की कोशिश थाईलैंड के बल्लेबाजी क्रम पर शुरुआत से ही दबाव बनाने की होगी।
वहीं थाईलैंड की टीम भी भारत के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतर सकती है। उसने अपने पिछले मुकाबले में हांगकांग को छह रन से हराया था। थाईलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 120 रन बनाए और फिर हांगकांग को सात विकेट पर 114 रन पर रोक दिया। कप्तान नारुएमोल चाईवाई ने 43 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, जबकि ओन्निचा कामचोमफू ने तीन और फनिता माया ने दो विकेट लेकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।
भारत और थाईलैंड के बीच मुकाबले में भारतीय टीम को कागजों पर मजबूत माना जा सकता है, लेकिन हाल की फॉर्म को देखते हुए थाईलैंड को हल्के में लेना टीम के लिए भारी पड़ सकता है। भारत को बल्लेबाजी में निरंतरता, गेंदबाजी में अनुशासन और फील्डिंग में मजबूती दिखानी होगी। अगर हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम शुरुआत से ही दबाव बनाए रखने में सफल रहती है, तो भारतीय टीम बड़ी जीत के साथ एशिया कप अभियान की शुरुआत कर सकती है।


