उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से सामने आई एक प्रशासनिक कार्रवाई ने अब सियासी रंग ले लिया है। जिला कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद को प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
प्रशासन के मुताबिक, यह मस्जिद सरकारी जमीन पर कथित तौर पर अवैध तरीके से बनाई गई थी। बताया गया है कि सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने इस निर्माण को हटाने की कार्रवाई की।
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन की टीम ने बुलडोजर की मदद से मस्जिद के ढांचे को ध्वस्त कर दिया। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
जैसे ही मस्जिद पर हुई कार्रवाई की खबर सामने आई, राजनीतिक दलों की तरफ से प्रतिक्रियाएं आने लगीं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, AIMIM और BSP ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की तरफ से भी इस मामले को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि धार्मिक स्थल से जुड़ी कार्रवाई को लेकर प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ कदम उठाना चाहिए था। इस मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक बहस और तेज होती दिखाई दे रही है।
दूसरी तरफ बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। बीजेपी का कहना है कि प्रशासन ने अदालत के आदेश के आधार पर कार्रवाई की है और सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के खिलाफ कदम उठाना कानून व्यवस्था का हिस्सा है।
बीजेपी की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि इस कार्रवाई को धार्मिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि अगर किसी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण हुआ है तो कानून के मुताबिक उसे हटाया जा सकता है।
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा मुद्दा यही बन गया है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासनिक कदम थी या फिर इसे राजनीतिक और धार्मिक नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।
सहारनपुर में हुई इस कार्रवाई के बाद सियासी बयानबाजी लगातार बढ़ रही है। विपक्ष जहां सरकार से सवाल कर रहा है, वहीं बीजेपी अदालत के आदेश और सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण का हवाला देकर कार्रवाई को सही बता रही है।
मामले ने उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस विवाद को लेकर आगे और कौन-कौन से राजनीतिक बयान सामने आते हैं और प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या विस्तृत जानकारी दी जाती है।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई है। वहीं राजनीतिक दल अपने-अपने नजरिए से इस मुद्दे को उठा रहे हैं। ऐसे में सहारनपुर की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बड़ा मुद्दा बन सकती है।


