सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में घमासान तेज हो गया है। प्रशासन की कार्रवाई के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन के मुताबिक, कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद को अवैध घोषित किया गया था और अदालत में फर्स्ट अपील खारिज होने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर इसे हटाने की कार्रवाई की गई।
बताया जा रहा है कि प्रशासन ने तड़के भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चार बुलडोजरों की मदद से मस्जिद को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी।
लेकिन जैसे ही यह कार्रवाई सामने आई, विपक्षी नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन, विधायक आशु मलिक और कांग्रेस नेता इमरान मसूद समेत कई नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि आखिर रात के समय ऐसी कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन रात में फोन नहीं उठाए गए और सुबह मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।
वहीं सपा सांसद इकरा हसन ने भी इस कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं को मौके पर जाने से रोकने के लिए उन्हें उनके घरों में नजरबंद किया गया। इकरा हसन समेत अन्य नेताओं ने इस मामले को अदालत में ले जाने की बात कही है।
सपा विधायक आशु मलिक ने भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया और जल्दबाजी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी।
विपक्ष की ओर से इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान से जोड़कर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नेताओं का कहना है कि धार्मिक स्थल से जुड़े मामले में प्रशासन को पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए थी।
दूसरी तरफ प्रशासन का पक्ष अलग है। अधिकारियों के मुताबिक, मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण के तौर पर घोषित किया गया था और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई नेताओं को मौके पर पहुंचने से रोक दिया। प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए।
अब इस पूरे मामले में सियासी विवाद बढ़ता जा रहा है। विपक्षी नेता जहां कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन अदालत के आदेश और कानूनी प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।
इमरान मसूद, इकरा हसन और अन्य नेताओं के कोर्ट जाने के ऐलान के बाद अब यह मामला कानूनी लड़ाई का रूप भी ले सकता है। आने वाले दिनों में अदालत में इस कार्रवाई को लेकर क्या दलीलें दी जाती हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
सहारनपुर की यह कार्रवाई एक बार फिर उत्तर प्रदेश में बुलडोजर एक्शन और सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर होने वाली राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। अब सवाल सिर्फ मस्जिद के ध्वस्तीकरण का नहीं, बल्कि कार्रवाई के समय, प्रक्रिया और नेताओं को नजरबंद किए जाने को लेकर भी उठ रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई, जबकि विपक्ष इसे संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर विरोध कर रहा है। ऐसे में सहारनपुर का यह मामला आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की सियासत के साथ-साथ अदालत में भी सुर्खियों में रह सकता है।


