भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह श्रीलंका के दौरे पर पहुंचे हैं, जहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। हाई-लेवल डेलीगेशन के साथ श्रीलंका पहुंचे रक्षा मंत्री का यह दौरा दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती देने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनाथ सिंह अपनी यात्रा के दौरान श्रीलंका के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के साथ कई अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे।
भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देश एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। भारत की ओर से श्रीलंका को हिंद महासागर क्षेत्र में एक अहम पड़ोसी और रणनीतिक साझेदार माना जाता है।
राजनाथ सिंह के इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करना है। हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में पहले से ही साझेदारी मौजूद है।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारत और श्रीलंका के संबंध गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा, रक्षा सहयोग, आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क को भी मजबूत किया जा रहा है। ऐसे में राजनाथ सिंह की यात्रा को इन संबंधों को और आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
राजनाथ सिंह ने श्रीलंका रवाना होने से पहले उम्मीद जताई थी कि उनकी यात्रा के दौरान श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ उपयोगी और सकारात्मक बातचीत होगी। उन्होंने श्रीलंका को भारत की ‘Neighborhood First’ यानी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति और MAHASAGAR विजन के तहत एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया।
Neighborhood First नीति के तहत भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को प्राथमिकता देता है। भारत का मानना है कि आसपास के देशों में शांति, स्थिरता और विकास क्षेत्र की सामूहिक प्रगति के लिए जरूरी है। श्रीलंका इस नीति में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वह भारत के बेहद करीब स्थित है और हिंद महासागर में उसकी रणनीतिक स्थिति महत्वपूर्ण है।
वहीं MAHASAGAR विजन भारत की समुद्री सोच से जुड़ा है। इसका उद्देश्य हिंद महासागर और व्यापक समुद्री क्षेत्र में सहयोग, सुरक्षा, विकास और सभी के लिए समृद्धि को बढ़ावा देना है। श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए इस विजन के तहत दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग की संभावनाएं काफी महत्वपूर्ण हैं।
राजनाथ सिंह अपनी यात्रा के दौरान कोलंबो में भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय के साथ संपर्क भारत की कूटनीतिक पहुंच का अहम हिस्सा रहा है। श्रीलंका में भी भारतीय मूल के लोगों की मजबूत उपस्थिति दोनों देशों के सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा बनाती है।
भारत और श्रीलंका के रिश्तों में रक्षा सहयोग के साथ आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी भी महत्वपूर्ण है। दोनों देश क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, निवेश, विकास परियोजनाओं और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने पर लगातार काम कर रहे हैं। भारत ने श्रीलंका के विकास में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग भी दिया है।
राजनाथ सिंह का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए श्रीलंका के साथ मजबूत और भरोसेमंद साझेदारी बनाए रखना बेहद अहम है। दोनों देशों के बीच बेहतर रक्षा और समुद्री सहयोग न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर सकता है, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को भी बढ़ावा दे सकता है।
कुल मिलाकर राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा भारत की Neighborhood First नीति और MAHASAGAR विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिलने की उम्मीद है। अब नजर इस बात पर होगी कि राजनाथ सिंह और श्रीलंकाई नेतृत्व के बीच होने वाली बातचीत से किन नए समझौतों और सहयोग की राह खुलती है।


