भारतीय कुश्ती के लिए एशियाई खेलों से पहले एक और बड़ा झटका लगा है। ग्रीको रोमन पहलवान दीपक डोप टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ क्लोमीफीन पाए जाने के बाद एशियाई खेलों की टीम से बाहर कर दिए गए हैं। भारतीय कुश्ती महासंघ यानी WFI ने उनका नाम वापस लेने का फैसला किया है। इससे एशियाई खेलों में भारत की कुश्ती चुनौती और कमजोर हो गई है।
राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी यानी NADA की जांच में दीपक के मूत्र के नमूने में क्लोमीफीन की मौजूदगी पाई गई। यह नमूना 31 मई 2026 को लखनऊ में हुए एशियाई खेलों के चयन ट्रायल के दौरान लिया गया था। NADA के मुताबिक, 23 जुलाई को नमूने में असामान्य निष्कर्ष सामने आया। इसके बाद जांच और 17 अगस्त को पहलवान के साथ हुई बातचीत के बाद मामले को प्रतिकूल विश्लेषणात्मक निष्कर्ष यानी AAF के तौर पर आगे बढ़ाया गया।
क्लोमीफीन को 2026 की विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी यानी WADA की प्रतिबंधित सूची में S4 श्रेणी में रखा गया है। यह हार्मोन और मेटाबोलिक मॉड्यूलेटर्स की श्रेणी में आता है। क्लोमीफीन का इस्तेमाल आमतौर पर पुरुषों और महिलाओं में बांझपन के इलाज के लिए किया जाता है। हालांकि, दीपक के मामले में इस पदार्थ के उनके शरीर में पाए जाने की वजह क्या रही, यह आगे की प्रक्रिया में स्पष्ट हो सकती है।
25 वर्षीय दीपक ने 31 मई को लखनऊ में हुए चयन ट्रायल में अप्रत्याशित जीत हासिल करके एशियाई खेलों की टीम में जगह बनाई थी। वह भारतीय डाक सेवा से एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने वाले पहले पहलवान बने थे। इससे पहले उन्होंने फेडरेशन कप में पदक जीतकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। खास बात यह है कि दीपक इससे पहले कभी राष्ट्रीय शिविर का हिस्सा नहीं रहे थे।
डोपिंग मामले के सामने आने के बाद WFI ने उन्हें टीम से हटाने का फैसला किया है। महासंघ के एक अधिकारी के मुताबिक, अगर एशियाई खेलों के दौरान दीपक का नमूना दोबारा पॉजिटिव आता है तो विश्व कुश्ती की संचालन संस्था UWW की ओर से WFI पर 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी संभावित कार्रवाई से बचने के लिए महासंघ ने उनका नाम वापस लेने का फैसला किया है।
भारतीय कुश्ती पहले ही डोपिंग मामलों के कारण एशियाई खेलों में दो स्थान गंवा चुकी है। पुरुष फ्रीस्टाइल 86 किलोग्राम वर्ग के मुकुल दहिया और ग्रीको रोमन 130 किलोग्राम वर्ग के दीपांशु के खिलाफ भी डोपिंग मामले सामने आए थे। ऐसे में दीपक का मामला भारतीय कुश्ती के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
हालांकि NADA की अधिसूचना में दीपक पर फिलहाल अस्थायी निलंबन लगाए जाने की बात नहीं कही गई है। इसका मतलब है कि मामले का अंतिम फैसला होने तक वह प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकते हैं, जब तक कि बाद में उन पर अस्थायी या अन्य प्रकार का निलंबन नहीं लगाया जाता। लेकिन अगर डोपिंग रोधी नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो 31 मई 2026 से लेकर संभावित निलंबन शुरू होने तक उनके हासिल किए गए परिणामों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
दीपक के पास अपने ‘A’ नमूने के नतीजे को चुनौती देने का अधिकार भी है। वह ‘B’ नमूने की जांच कराने का अनुरोध कर सकते हैं। इसके लिए नोटिस मिलने के सात दिनों के भीतर उन्हें इस अधिकार का इस्तेमाल करना होगा। अगर B नमूने में भी क्लोमीफीन की मौजूदगी की पुष्टि होती है या दीपक B नमूने की जांच कराने से इनकार करते हैं, तो डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो सकती है।
WFI अधिकारी ने यह भी कहा कि महासंघ को अगर डोपिंग जांच के नतीजे समय पर मिल जाते तो वह एशियाई खेलों के लिए दूसरे पहलवानों के नाम भेज सकता था। अधिकारी के मुताबिक, दीपांशु का परीक्षण मार्च में हुआ था, लेकिन उसका नतीजा जुलाई में मिला। वहीं मुकुल और दीपक के नमूने 31 मई को लिए गए थे और उनके नतीजे अब सामने आए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय कुश्ती में डोपिंग टेस्ट की रिपोर्ट मिलने में हो रही देरी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल दीपक का एशियाई खेलों से बाहर होना तय है और उनके मामले में आगे की प्रक्रिया B नमूने और NADA के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी।


