प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित BRICS बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था और BRICS की बढ़ती ताकत को लेकर बड़ा बयान दिया। दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता के बीच प्रधानमंत्री ने BRICS देशों को ग्लोबल इनोवेशन और नए समाधान के महत्वपूर्ण केंद्र के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि BRICS का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसकी आर्थिक रफ्तार भी दुनिया के मुकाबले तेज बनी हुई है। प्रधानमंत्री के मुताबिक BRICS की बढ़ती ताकत, इसका विस्तार और इससे जुड़ी उम्मीदें अब साफ तौर पर दिखाई दे रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज BRICS देश दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत GDP और 25 प्रतिशत से ज्यादा वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS का महत्व कितना बढ़ चुका है। मोदी ने वैश्विक GDP और BRICS देशों की आर्थिक वृद्धि की तुलना करते हुए बताया कि पिछले वर्षों में दुनिया की GDP लगभग ढाई गुना बढ़ी है, जबकि BRICS देशों की कुल GDP करीब साढ़े चार गुना बढ़ी है।
प्रधानमंत्री ने इसी आधार पर कहा कि BRICS देशों की आर्थिक ताकत बाकी दुनिया की तुलना में लगभग दोगुनी तेज गति से बढ़ी है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब BRICS को दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने वाले महत्वपूर्ण समूह के तौर पर देखा जा रहा है। भारत समेत BRICS के कई सदस्य देश बड़े बाजार, युवा आबादी, प्राकृतिक संसाधनों और तेजी से विकसित होती तकनीकी क्षमताओं के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मोदी ने अपने संबोधन में केवल आर्थिक विकास की बात नहीं की, बल्कि इनोवेशन पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि BRICS देश ग्लोबल इनोवेशन और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उनके मुताबिक इन देशों में इनोवेशन की नई संभावनाएं लगातार आकार ले रही हैं। इनमें जमीनी स्तर पर होने वाली पहल से लेकर अत्याधुनिक तकनीकों तक का विस्तार शामिल है। प्रधानमंत्री का कहना था कि अलग-अलग देशों के अनुभव और क्षमताएं एक साथ आकर वैश्विक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भारत की BRICS अध्यक्षता के विषय का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का विषय मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने इसी सोच को अपनी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों का आधार बनाया है। उनके मुताबिक भारत लगातार ऐसी नीतियों पर काम कर रहा है, जिनसे अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ इनोवेशन और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की दुनिया कई तरह की अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। ऐसे समय में देशों के बीच सहयोग और आर्थिक साझेदारी पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। BRICS के मंच से भारत इसी सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। व्यापार, तकनीक, निवेश और इनोवेशन के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ने से आर्थिक विकास को नई गति मिल सकती है। भारत का प्रयास है कि BRICS को ऐसे प्रभावी मंच के रूप में मजबूत किया जाए, जहां सदस्य देश अपने अनुभव साझा करने के साथ-साथ साझा चुनौतियों के समाधान पर भी काम कर सकें।
BRICS बिजनेस फोरम की खासियत बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में आयोजित यह अब तक का सबसे बड़ा BRICS बिजनेस फोरम है। इससे इस मंच के बढ़ते प्रभाव और कारोबारी समुदाय की बढ़ती रुचि का अंदाजा लगाया जा सकता है। बिजनेस फोरम में विभिन्न देशों के कारोबारी प्रतिनिधियों और नेताओं की भागीदारी से व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर चर्चा का रास्ता खुलता है।
मोदी के बयान से साफ है कि भारत BRICS को केवल आर्थिक समूह के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे इनोवेशन, तकनीक और वैश्विक समाधान के महत्वपूर्ण मंच के तौर पर भी आगे बढ़ाना चाहता है। भारत की अध्यक्षता में मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और स्थिरता पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है, BRICS देशों की तेज आर्थिक वृद्धि और बढ़ता दायरा वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत दे रहा है।
कुल मिलाकर BRICS बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश साफ था कि BRICS की आर्थिक ताकत तेजी से बढ़ रही है और इसका प्रभाव अब वैश्विक स्तर पर दिखाई देने लगा है। दुनिया की बड़ी आबादी, वैश्विक GDP और व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी के साथ BRICS आने वाले समय में आर्थिक सहयोग और इनोवेशन का बड़ा केंद्र बन सकता है। प्रधानमंत्री ने जिस तरह BRICS की रफ्तार, दायरे और उम्मीदों का जिक्र किया, उससे भारत की प्राथमिकता भी स्पष्ट होती है कि समूह को मजबूत आर्थिक साझेदारी, इनोवेशन और स्थिर वैश्विक विकास के लिए और प्रभावी बनाया जाए।


