अमेठी जिले के भौसिंहपुर गांव में योगी सरकार के पिछले पांच साल के कामकाज को लेकर ग्रामीणों की अलग-अलग राय सामने आई है। गांव के ब्राह्मण समाज के लोगों ने सरकार की कई योजनाओं और विकास कार्यों की तारीफ की है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में गांव की तस्वीर में बदलाव देखने को मिला है। पक्की सड़क, गरीब परिवारों के लिए मकान, राशन जैसी सरकारी सुविधाओं के साथ शिक्षा और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी ग्रामीणों ने अपनी बात रखी। हालांकि विकास कार्यों की तारीफ के साथ गांव के लोगों ने सरकार के सामने कुछ मांगें भी रखी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख मांग युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की है।
ग्रामीणों के मुताबिक पहले गांव में बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई तरह की परेशानियां थीं, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। गांव में पक्की सड़क बनने से आवागमन आसान हुआ है और लोगों को आने-जाने में पहले की तुलना में सुविधा मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी बुनियादी सुविधा किसी भी गांव के विकास की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल होती है और इसका सीधा असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। गांव में सड़क की सुविधा बेहतर होने से बच्चों के स्कूल जाने से लेकर बाजार और दूसरे जरूरी स्थानों तक पहुंचना आसान हुआ है।
गरीब परिवारों के लिए पक्के मकानों का मुद्दा भी ग्रामीणों ने प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध हुए हैं। जिन परिवारों के पास पहले रहने के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं थी, उन्हें आवास योजना का लाभ मिलने से राहत मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि पक्का घर केवल छत उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि इससे परिवारों को सुरक्षा और स्थायित्व भी मिलता है। हालांकि हर पात्र परिवार को योजना का लाभ मिला या नहीं, इसे लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग अनुभव हो सकते हैं।
राशन व्यवस्था को लेकर भी गांव के लोगों ने अपनी बात रखी। ग्रामीणों के मुताबिक जरूरतमंद परिवारों को राशन मिल रहा है और सरकारी खाद्यान्न योजना से गरीब परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है। उनका कहना है कि महंगाई के दौर में अगर परिवार को निर्धारित राशन मिल जाता है तो घरेलू खर्च का बोझ कुछ कम होता है। ग्रामीणों ने सरकार की उन योजनाओं का भी जिक्र किया, जिनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
गांव में शिक्षा से जुड़ी एक खास सुविधा के तौर पर फ्री लाइब्रेरी का भी जिक्र सामने आया। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में बच्चों और युवाओं के लिए पढ़ाई का बेहतर माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। फ्री लाइब्रेरी जैसी सुविधा ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए उपयोगी हो सकती है, खासकर उन विद्यार्थियों के लिए जिनके घर पर पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। अगर युवाओं को किताबें, पढ़ने की जगह और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी सामग्री आसानी से मिलती है तो इससे उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गांव की महिलाओं ने सकारात्मक बात कही। उनका कहना है कि अब उन्हें पहले की तुलना में ज्यादा सुरक्षित माहौल महसूस होता है। महिलाओं के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार होने से वे घर से बाहर निकलने और अपने जरूरी काम करने में ज्यादा सहज महसूस करती हैं। हालांकि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जागरूकता की भी बड़ी भूमिका होती है।
लेकिन ग्रामीणों की बात केवल सरकार की तारीफ तक सीमित नहीं रही। गांव के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग भी सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके तो उन्हें नौकरी की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। युवाओं को छोटे कारोबार, कौशल प्रशिक्षण और स्वरोजगार के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई।
कुल मिलाकर अमेठी के भौसिंहपुर गांव में ग्रामीणों की बातचीत से विकास को लेकर सकारात्मक अनुभव के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों की तस्वीर भी सामने आई। पक्की सड़क, आवास, राशन, लाइब्रेरी और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ग्रामीणों ने सरकार के काम की तारीफ की, लेकिन साथ ही युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग भी रखी। यानी ग्रामीणों के मुताबिक विकास का सफर आगे बढ़ा है, लेकिन अब उनकी उम्मीदें गांव में रोजगार, बेहतर अवसर और युवाओं के भविष्य से जुड़ी हैं। आने वाले समय में सरकार और स्थानीय प्रशासन इन मांगों पर कितना ध्यान देते हैं, यही भौसिंहपुर जैसे गांवों के विकास की अगली तस्वीर तय करेगा।


