न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर एक अहम मुलाकात हुई है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रणनीतिक सहयोग और आगामी उच्चस्तरीय बैठकों को लेकर गतिविधियां तेज हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर हुई, जहां दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधि वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के लिए जुटे हैं। जयशंकर और रुबियो की इस बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संभावित द्विपक्षीय बातचीत की तैयारी चल रही है।
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में अमेरिका के फ्लोरिडा में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले हैं। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। ऐसे में जयशंकर और रुबियो की मुलाकात को दोनों देशों के बीच आगामी उच्चस्तरीय संवाद की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के सभी बिंदुओं का विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन भारत और अमेरिका के संबंधों से जुड़े कई अहम विषय इस समय चर्चा के केंद्र में हैं।
इनमें सबसे प्रमुख मुद्दों में व्यापार वार्ता शामिल है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। दोनों पक्षों के बीच व्यापार से जुड़े विषयों पर बातचीत होती रही है और आने वाले समय में भी इस दिशा में चर्चा जारी रहने की संभावना है। ऐसे में जयशंकर और रुबियो की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों तथा आर्थिक सहयोग से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस सत्र के दौरान भारत की कूटनीतिक सक्रियता केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें की हैं। इन बैठकों के माध्यम से भारत विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत की कूटनीति के लिहाज से संयुक्त राष्ट्र महासभा का मंच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां एक ही स्थान पर दुनिया के अलग-अलग देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का अवसर मिलता है।
भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी सीट के लिए भी समर्थन जुटाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका और स्थायी सदस्यता की मांग लंबे समय से उसकी विदेश नीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही है। ऐसे में विभिन्न देशों के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकें भारत के लिए कूटनीतिक समर्थन मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करती हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर के आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने की भी उम्मीद है। उनके संबोधन में भारत की विदेश नीति, वैश्विक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े विषयों पर भारत का पक्ष सामने आ सकता है। दुनिया इस समय व्यापार, सुरक्षा, क्षेत्रीय संघर्ष और बदलती वैश्विक परिस्थितियों जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत की भूमिका और उसके कूटनीतिक दृष्टिकोण पर भी नजर रहेगी।
फिलहाल जयशंकर और रुबियो की मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों में चल रही उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। खास तौर पर दिसंबर में प्रस्तावित जी20 शिखर सम्मेलन और मोदी-ट्रंप द्विपक्षीय बैठक से पहले दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई यह बातचीत आगे की वार्ताओं के लिए महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार कर सकती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तथा अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच किन मुद्दों पर चर्चा होती है।


